सेकंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे (Second Lieutenant Ram Raghoba Rane)

  • मूल नाम -राम राघोबा राणे
  • पिता – राघोबा पी राणे
  • जन्म – 26 जून 1918
  • उपाधि – सेकंड लेफ्टिनेंट, बाद में मेजर
  • देहांत – 11 जुलाई 1994 (उम्र 76)

राम राघोबा राणे का जीवन परिचय-

कर्नाटक के करवार जिले में हावेरी गांव में 26 जून 1918 को राम राघोबा राणे का जन्म हुआ था।राम राघोबा राणे  के पिता पुलिस में कांस्टेबल थे।जो उस वक्त कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के चंदिया गांव अपनी सेवा दे रहे थे।पिता का लगातार स्थानान्तरण होने के कारण राम राघोबा राणे की प्रारंभिक शिक्षा, ज्यादातर जिला स्कूल में हुई थी।वर्ष 1930 में राम राघोबा राणे को महात्मा गाँधी के असहयोग आंदोलन से काफी प्रभावित हुए थे।इससे बाद इन्होने आन्दोलनों में भागीदारी लेना शुरू कर दिया था। जिनसे इनके पिता काफ़ी चिंतित हो गये थे,इसलिए उनके पिता पुरे परिवार के साथ चंदिया में अपने पैतृक गांव वापस चले गये।

राम राघोबा राणे का सैन्य जीवन-

राम राघोबा राणे ब्रिटिश भारतीय सेना विश्व युद्ध के दौरान कार्यरत थे।युद्ध के बाद 15 दिसंबर 1947 को राम राघोबा राणे को भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के बॉम्बे सैपर्स रेजिमेंट में नियुक्त किया गया।

भारत-पाकिस्तान युद्ध-

आज़ादी के तुरंत बाद ही पकिस्तान ने कश्मीर में हमला कर दिया था। जिससे कश्मीर के राजा हरी सिंह ने भारतीय सरकार से मदद मागी और भारतीय सेना को कश्मीर भेजा गया।08 अप्रैल 1948 को बॉम्बे सैपर्स के सेकंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे को नौशेरा-राजौरी रोड के माइल 26 पर बारूदी सुरंगों व अवरोधों को हटाने का जिम्मा सौपा गया था।इस युद्ध में राम राघोबा राणे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।पाकिस्तानियों ने माइल 26  क्षेत्र में भारी गोलाबारी और गोलिया चलाना शुरू कर दिया था जिस कारण बारूदी सुरंग को साफ़ करने वाले दल के दो जवान वीरगति को प्राप्त हो गये थे तथा पांच सैनिक घायल हो गये थे।घायल सैनिको में राम राघोबा राणे  भी थे लेकिन घायल होते हुए भी वो एक विशालकाय स्टूअर्ट टैंक के नीचे गए और उसके साथ-साथ रेंगने लगे।टैंक के निचे आने के बाद भी सेकंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे  खतरनाक पहियों के अनुरूप रेंगते हुए आगे बढते रहे और टैंक ड्राइवर को एक रस्सी द्वारा संकेत देते रहे।इन्ही संकेतो की वजह से टैंक को बारूदी सुरंगों से सुरक्षित निकाल लिया गया और इसी तरह उन्होंने खुद की जान की परवाह न करते हुए सभी भारतीय टैंकों को एक सुरक्षित बाहर निकल लिया गया था।इनकी इसी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण भारतीय सेना द्वारा राजौरी का कब्जा कर लिया था।1949 में भारतीय सेना से मेजर राम राघोबा राणे सेवानिवृत्त हुए।1994 में 76 वर्ष की उम्र में राम राघोबा राणे की मृत्यु हो गयी थी।

परमवीर चक्र-

सेकंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे को अदम्य साहस और उच्च कोटि की वीरता प्रदर्शित करने के लिए परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।