उत्तराखंड में आर्य समाज और इसाई धर्म का प्रभाव  (Impact of Arya Samaj and Christianity in Uttarakhand)

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उत्तरखंड में आर्य समाज-

  • 1854-1855 में उत्तराखंड दया नन्द सरस्वती  भ्रमण पर आये थे।
  • दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना 10 अप्रैल  1875 में की थी।
  • 1876 में उन्होंने कुम्भ मेले के दौरान अपने विचारों का प्रचार किया।
  • सर्वप्रथम 1875 में नैनीताल में बनी सत्य धर्म प्रचारीणी का आर्य समाज में विरोध कर दिया गया।
  • आर्य समाज बनने के बाद इसकी शाखाये 1910 में जसपुर, 1926 में रामगढ़ मे खोली गयी
  • 1910 में दुगड्डा में पहला आर्य समाज के शुद्धिकरण समारोह में जनेऊ प्रदान की गयी।
  • दुगड्डा, लंगूरगाड़ और सिलगाड़ नमक दो धाराओ के संगम पर स्थित है।

उत्तराखंड में इसाई धर्म-

  • लन्दन मिशनरी द्वारा पादरी रैवरेण्ड वडन जो बनारस तथा मिर्जापुर में इसाई धर्म का प्रचार कर रहे थे।
  • यह पादरी 1850 में स्वस्थ्य लाभ के लिए अलमोड़ा आये थे।
  • पादरी मैसमोर द्वारा पौड़ी मिशन स्कूल का उच्चीकरण करके 1901में हाई स्कूल तक किया गया।
  • मैथेलिस्ट मिशन ने चोपडा (पौड़ी) मे 1926 मे पहला जुबली चर्च की स्थापना की गयी।
  • उत्तराखंड से इसाई धर्म स्वीकार करने वाला पहला व्यक्ति ख्याली था। जिसने अपना नाम बदल कर साइमन पीटर रख दिया था।
  • पौड़ी में एस एस विक्स ने 1923 में कोटद्वार में न्यार नदी के उप्पर बाघाट पौड़ी पुल की मरमत करवाई।